महाभारत 2.16.30
उवाच च महाप्राज्ञस्तं राजानं महामुनिःगच्छ राजन्कृतार्थोऽसि निवर्त मनुजाधिप
uvāca ca mahāprājñastaṃ rājānaṃ mahāmuniḥgaccha rājankṛtārtho'si nivarta manujādhipa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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