महाभारत 2.16.41
ततः सा राक्षसी राजन्विस्मयोत्फुल्ललोचनान शशाक समुद्वोढुं वज्रसारमयं शिशुम्
tataḥ sā rākṣasī rājanvismayotphullalocanāna śaśāka samudvoḍhuṃ vajrasāramayaṃ śiśum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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