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महाभारत 2.16.7
अनवद्या ह्यसंबुद्धाः प्रविष्टाः शत्रुसद्म तत्शत्रुदेहमुपाक्रम्य तं कामं प्राप्नुयामहे
anavadyā hyasaṃbuddhāḥ praviṣṭāḥ śatrusadma tatśatrudehamupākramya taṃ kāmaṃ prāpnuyāmahe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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