महाभारत 2.17.3
संश्लेषिते मया दैवात्कुमारः समपद्यततव भाग्यैर्महाराज हेतुमात्रमहं त्विह
saṃśleṣite mayā daivātkumāraḥ samapadyatatava bhāgyairmahārāja hetumātramahaṃ tviha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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