महाभारत 2.19.10
अपरिहार्या मेघानां मागधेयं मणेः कृतेकौशिको मणिमांश्चैव ववृधाते ह्यनुग्रहम्
aparihāryā meghānāṃ māgadheyaṃ maṇeḥ kṛtekauśiko maṇimāṃścaiva vavṛdhāte hyanugraham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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