महाभारत 2.19.16
आनह्य चर्मणा तेन स्थापयामास स्वे पुरेयत्र ताः प्राणदन्भेर्यो दिव्यपुष्पावचूर्णिताः
ānahya carmaṇā tena sthāpayāmāsa sve pureyatra tāḥ prāṇadanbheryo divyapuṣpāvacūrṇitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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