महाभारत 2.19.20
एतस्मिन्नेव काले तु जरासंधं समर्चयन्पर्यग्नि कुर्वंश्च नृपं द्विरदस्थं पुरोहिताः
etasminneva kāle tu jarāsaṃdhaṃ samarcayanparyagni kurvaṃśca nṛpaṃ dviradasthaṃ purohitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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