महाभारत 2.19.29
तान्पाद्यमधुपर्कार्हान्मानार्हान्सत्कृतिं गतान्प्रत्युत्थाय जरासंध उपतस्थे यथाविधि
tānpādyamadhuparkārhānmānārhānsatkṛtiṃ gatānpratyutthāya jarāsaṃdha upatasthe yathāvidhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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