महाभारत 2.19.2
वैहारो विपुलः शैलो वराहो वृषभस्तथातथैवर्षिगिरिस्तात शुभाश्चैत्यकपञ्चमाः
vaihāro vipulaḥ śailo varāho vṛṣabhastathātathaivarṣigiristāta śubhāścaityakapañcamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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