महाभारत 2.19.36
अथोपविविशुः सर्वे त्रयस्ते पुरुषर्षभाःसंप्रदीप्तास्त्रयो लक्ष्म्या महाध्वर इवाग्नयः
athopaviviśuḥ sarve trayaste puruṣarṣabhāḥsaṃpradīptāstrayo lakṣmyā mahādhvara ivāgnayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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