महाभारत 2.19.39
ते यूयं पुष्पवन्तश्च भुजैर्ज्याघातलक्षणैःबिभ्रतः क्षात्रमोजश्च ब्राह्मण्यं प्रतिजानथ
te yūyaṃ puṣpavantaśca bhujairjyāghātalakṣaṇaiḥbibhrataḥ kṣātramojaśca brāhmaṇyaṃ pratijānatha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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