महाभारत 2.19.43
एवं च मामुपस्थाय कस्माच्च विधिनार्हणाम्प्रणीतां नो न गृह्णीत कार्यं किं चास्मदागमे
evaṃ ca māmupasthāya kasmācca vidhinārhaṇāmpraṇītāṃ no na gṛhṇīta kāryaṃ kiṃ cāsmadāgame
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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