महाभारत 2.20.19
मावमंस्थाः परान्राजन्नास्ति वीर्यं नरे नरेसमं तेजस्त्वया चैव केवलं मनुजेश्वर
māvamaṃsthāḥ parānrājannāsti vīryaṃ nare naresamaṃ tejastvayā caiva kevalaṃ manujeśvara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें