महाभारत 2.20.34
नात्मनात्मवतां मुख्य इयेष मधुसूदनःब्रह्मणोऽऽज्ञां पुरस्कृत्य हन्तुं हलधरानुजः
nātmanātmavatāṃ mukhya iyeṣa madhusūdanaḥbrahmaṇo''jñāṃ puraskṛtya hantuṃ haladharānujaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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