महाभारत 2.20.7
त्वया चोपहृता राजन्क्षत्रिया लोकवासिनःतदागः क्रूरमुत्पाद्य मन्यसे किं त्वनागसम्
tvayā copahṛtā rājankṣatriyā lokavāsinaḥtadāgaḥ krūramutpādya manyase kiṃ tvanāgasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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