महाभारत 2.21.5
कृतस्वस्त्ययनो विद्वान्ब्राह्मणेन यशस्विनासमनह्यज्जरासंधः क्षत्रधर्ममनुव्रतः
kṛtasvastyayano vidvānbrāhmaṇena yaśasvināsamanahyajjarāsaṃdhaḥ kṣatradharmamanuvrataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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