महाभारत 2.21.6अवमुच्य किरीटं स केशान्समनुमृज्य चउदतिष्ठज्जरासंधो वेलातिग इवार्णवःavamucya kirīṭaṃ sa keśānsamanumṛjya caudatiṣṭhajjarāsaṃdho velātiga ivārṇavaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें