महाभारत 2.21.7
उवाच मतिमान्राजा भीमं भीमपराक्रमम्भीम योत्स्ये त्वया सार्धं श्रेयसा निर्जितं वरम्
uvāca matimānrājā bhīmaṃ bhīmaparākramambhīma yotsye tvayā sārdhaṃ śreyasā nirjitaṃ varam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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