महाभारत 2.22.40
स नीचैः प्रश्रितो भूत्वा बहुरत्नपुरोगमःसहदेवो नृणां देवं वासुदेवमुपस्थितः
sa nīcaiḥ praśrito bhūtvā bahuratnapurogamaḥsahadevo nṛṇāṃ devaṃ vāsudevamupasthitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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