महाभारत 2.22.55
ततो युधिष्ठिरमुखाः पाण्डवा भरतर्षभप्रदक्षिणमकुर्वन्त कृष्णमक्लिष्टकारिणम्
tato yudhiṣṭhiramukhāḥ pāṇḍavā bharatarṣabhapradakṣiṇamakurvanta kṛṣṇamakliṣṭakāriṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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