महाभारत 2.22.5एवमुक्तस्तदा भीमो जरासंधमरिंदमःउत्क्षिप्य भ्रामयद्राजन्बलवन्तं महाबलःevamuktastadā bhīmo jarāsaṃdhamariṃdamaḥutkṣipya bhrāmayadrājanbalavantaṃ mahābalaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें