महाभारत 2.24.15
पौरवं तु विनिर्जित्य दस्यून्पर्वतवासिनःगणानुत्सवसंकेतानजयत्सप्त पाण्डवः
pauravaṃ tu vinirjitya dasyūnparvatavāsinaḥgaṇānutsavasaṃketānajayatsapta pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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