महाभारत 2.24.19ततः सिंहपुरं रम्यं चित्रायुधसुरक्षितम्प्रामथद्बलमास्थाय पाकशासनिराहवेtataḥ siṃhapuraṃ ramyaṃ citrāyudhasurakṣitamprāmathadbalamāsthāya pākaśāsanirāhaveइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें