महाभारत 2.24.6
ततो बृहन्तस्तरुणो बलेन चतुरङ्गिणानिष्क्रम्य नगरात्तस्माद्योधयामास पाण्डवम्
tato bṛhantastaruṇo balena caturaṅgiṇāniṣkramya nagarāttasmādyodhayāmāsa pāṇḍavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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