महाभारत 2.25.10
इदं पुरं यः प्रविशेद्ध्रुवं स न भवेन्नरःप्रीयामहे त्वया वीर पर्याप्तो विजयस्तव
idaṃ puraṃ yaḥ praviśeddhruvaṃ sa na bhavennaraḥprīyāmahe tvayā vīra paryāpto vijayastava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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