महाभारत 2.25.13
अथेह पुरुषव्याघ्र किंचिदन्यच्चिकीर्षसितद्ब्रवीहि करिष्यामो वचनात्तव भारत
atheha puruṣavyāghra kiṃcidanyaccikīrṣasitadbravīhi kariṣyāmo vacanāttava bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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