महाभारत 2.25.3
तं जित्वा हाटकं नाम देशं गुह्यकरक्षितम्पाकशासनिरव्यग्रः सहसैन्यः समासदत्
taṃ jitvā hāṭakaṃ nāma deśaṃ guhyakarakṣitampākaśāsaniravyagraḥ sahasainyaḥ samāsadat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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