महाभारत 2.26.10
ततो दक्षिणमागम्य पुलिन्दनगरं महत्सुकुमारं वशे चक्रे सुमित्रं च नराधिपम्
tato dakṣiṇamāgamya pulindanagaraṃ mahatsukumāraṃ vaśe cakre sumitraṃ ca narādhipam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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