महाभारत 2.26.13
तौ समेत्य महाराज कुरुचेदिवृषौ तदाउभयोरात्मकुलयोः कौशल्यं पर्यपृच्छताम्
tau sametya mahārāja kurucedivṛṣau tadāubhayorātmakulayoḥ kauśalyaṃ paryapṛcchatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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