महाभारत 2.27.24एवं बहुविधान्देशान्विजित्य पवनात्मजःवसु तेभ्य उपादाय लौहित्यमगमद्बलीevaṃ bahuvidhāndeśānvijitya pavanātmajaḥvasu tebhya upādāya lauhityamagamadbalīइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें