महाभारत 2.28.29
वेदास्त्वदर्थं जाताश्च जातवेदास्ततो ह्यसियज्ञविघ्नमिमं कर्तुं नार्हस्त्वं हव्यवाहन
vedāstvadarthaṃ jātāśca jātavedāstato hyasiyajñavighnamimaṃ kartuṃ nārhastvaṃ havyavāhana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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