महाभारत 2.28.32
तमभ्येत्य शनैर्वह्निरुवाच कुरुनन्दनम्सहदेवं नृणां देवं सान्त्वपूर्वमिदं वचः
tamabhyetya śanairvahniruvāca kurunandanamsahadevaṃ nṛṇāṃ devaṃ sāntvapūrvamidaṃ vacaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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