महाभारत 2.28.39
आहृतिं कौशिकाचार्यं यत्नेन महता ततःवशे चक्रे महाबाहुः सुराष्ट्राधिपतिं तथा
āhṛtiṃ kauśikācāryaṃ yatnena mahatā tataḥvaśe cakre mahābāhuḥ surāṣṭrādhipatiṃ tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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