महाभारत 2.28.41
भीष्मकाय स धर्मात्मा साक्षादिन्द्रसखाय वैस चास्य ससुतो राजन्प्रतिजग्राह शासनम्
bhīṣmakāya sa dharmātmā sākṣādindrasakhāya vaisa cāsya sasuto rājanpratijagrāha śāsanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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