महाभारत 2.28.42
प्रीतिपूर्वं महाबाहुर्वासुदेवमवेक्ष्य चततः स रत्नान्यादाय पुनः प्रायाद्युधां पतिः
prītipūrvaṃ mahābāhurvāsudevamavekṣya catataḥ sa ratnānyādāya punaḥ prāyādyudhāṃ patiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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