महाभारत 2.28.44
सागरद्वीपवासांश्च नृपतीन्म्लेच्छयोनिजान्निषादान्पुरुषादांश्च कर्णप्रावरणानपि
sāgaradvīpavāsāṃśca nṛpatīnmlecchayonijānniṣādānpuruṣādāṃśca karṇaprāvaraṇānapi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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