महाभारत 2.28.45
ये च कालमुखा नाम नरा राक्षसयोनयःकृत्स्नं कोल्लगिरिं चैव मुरचीपत्तनं तथा
ye ca kālamukhā nāma narā rākṣasayonayaḥkṛtsnaṃ kollagiriṃ caiva muracīpattanaṃ tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें