महाभारत 2.28.7
ततश्चर्मण्वतीकूले जम्भकस्यात्मजं नृपम्ददर्श वासुदेवेन शेषितं पूर्ववैरिणा
tataścarmaṇvatīkūle jambhakasyātmajaṃ nṛpamdadarśa vāsudevena śeṣitaṃ pūrvavairiṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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