महाभारत 2.29.15
ततः सागरकुक्षिस्थान्म्लेच्छान्परमदारुणान्पह्लवान्बर्बरांश्चैव तान्सर्वाननयद्वशम्
tataḥ sāgarakukṣisthānmlecchānparamadāruṇānpahlavānbarbarāṃścaiva tānsarvānanayadvaśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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