महाभारत 2.29.19
एवं प्रतीचीं नकुलो दिशं वरुणपालिताम्विजिग्ये वासुदेवेन निर्जितां भरतर्षभः
evaṃ pratīcīṃ nakulo diśaṃ varuṇapālitāmvijigye vāsudevena nirjitāṃ bharatarṣabhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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