महाभारत 2.29.6
शैरीषकं महेच्छं च वशे चक्रे महाद्युतिःशिबींस्त्रिगर्तानम्बष्ठान्मालवान्पञ्चकर्पटान्
śairīṣakaṃ mahecchaṃ ca vaśe cakre mahādyutiḥśibīṃstrigartānambaṣṭhānmālavānpañcakarpaṭān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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