महाभारत 2.29.8
गणानुत्सवसंकेतान्व्यजयत्पुरुषर्षभःसिन्धुकूलाश्रिता ये च ग्रामणेया महाबलाः
gaṇānutsavasaṃketānvyajayatpuruṣarṣabhaḥsindhukūlāśritā ye ca grāmaṇeyā mahābalāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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