महाभारत 2.3.13
नरनारायणौ ब्रह्मा यमः स्थाणुश्च पञ्चमःउपासते यत्र सत्रं सहस्रयुगपर्यये
naranārāyaṇau brahmā yamaḥ sthāṇuśca pañcamaḥupāsate yatra satraṃ sahasrayugaparyaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें