महाभारत 2.3.19सभा तु सा महाराज शातकुम्भमयद्रुमादश किष्कुसहस्राणि समन्तादायताभवत्sabhā tu sā mahārāja śātakumbhamayadrumādaśa kiṣkusahasrāṇi samantādāyatābhavatइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें