महाभारत 2.3.24
न दाशार्ही सुधर्मा वा ब्रह्मणो वापि तादृशीआसीद्रूपेण संपन्ना यां चक्रेऽप्रतिमां मयः
na dāśārhī sudharmā vā brahmaṇo vāpi tādṛśīāsīdrūpeṇa saṃpannā yāṃ cakre'pratimāṃ mayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें