महाभारत 2.3.32काननानि सुगन्धीनि पुष्करिण्यश्च सर्वशःहंसकारण्डवयुताश्चक्रवाकोपशोभिताःkānanāni sugandhīni puṣkariṇyaśca sarvaśaḥhaṃsakāraṇḍavayutāścakravākopaśobhitāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें