महाभारत 2.33.11
अथ चिन्तां समापेदे स मुनिर्मनुजाधिपनारदस्तं तदा पश्यन्सर्वक्षत्रसमागमम्
atha cintāṃ samāpede sa munirmanujādhipanāradastaṃ tadā paśyansarvakṣatrasamāgamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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