महाभारत 2.4.13
पर्वतश्च महाभागो मार्कण्डेयस्तथा मुनिःपवित्रपाणिः सावर्णिर्भालुकिर्गालवस्तथा
parvataśca mahābhāgo mārkaṇḍeyastathā muniḥpavitrapāṇiḥ sāvarṇirbhālukirgālavastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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