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महाभारत 2.4.21
जटासुरो मद्रकान्तश्च राजा; कुन्तिः कुणिन्दश्च किरातराजःतथाङ्गवङ्गौ सह पुण्ड्रकेण; पाण्ड्योड्रराजौ सह चान्ध्रकेण
jaṭāsuro madrakāntaśca rājā; kuntiḥ kuṇindaśca kirātarājaḥtathāṅgavaṅgau saha puṇḍrakeṇa; pāṇḍyoḍrarājau saha cāndhrakeṇa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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