महाभारत 2.4.23
श्रुतायुधश्च कालिङ्गो जयत्सेनश्च मागधःसुशर्मा चेकितानश्च सुरथोऽमित्रकर्षणः
śrutāyudhaśca kāliṅgo jayatsenaśca māgadhaḥsuśarmā cekitānaśca suratho'mitrakarṣaṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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